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Sunday, 26 May 2013
Friday, 17 May 2013
Amit Bhardwaj
`This day in 1999,
"Before going down in glory Brave Capt.Amit and Havildar Rajbir Singh killed more than 10 Pakis."
May 17, 1999
Capt. Amit Bhardwaj ventured to go and search Lt Saurabh Kalia and his men. He was leading the reinforcement column of 30 men when they were ambushed en route by Pakistani cowards armed with light & medium weaponry. With the help of Havildar Rajbir Singh, he decided to divert the attention of the enemy & ordered his Second-in-Command to get the men out of the battle area. The two gallant men were killed; the others survived, though all were wounded. Capt. Bhardwaj and Havildar Rajbir Singh fought like true, brave soldiers and killed more than 10 infiltrators. Their bodies lay in deep valley of Himalayas, till it was retrieved on July 13, 1999- 56 days later.
Capt. Bharadwaj’s weapon was found in his hand when his body was recovered. He had fought till his last breath.
Never forget, Never forgive
They Died for Us,
RespectJai Hind
"Before going down in glory Brave Capt.Amit and Havildar Rajbir Singh killed more than 10 Pakis."
May 17, 1999
Capt. Amit Bhardwaj ventured to go and search Lt Saurabh Kalia and his men. He was leading the reinforcement column of 30 men when they were ambushed en route by Pakistani cowards armed with light & medium weaponry. With the help of Havildar Rajbir Singh, he decided to divert the attention of the enemy & ordered his Second-in-Command to get the men out of the battle area. The two gallant men were killed; the others survived, though all were wounded. Capt. Bhardwaj and Havildar Rajbir Singh fought like true, brave soldiers and killed more than 10 infiltrators. Their bodies lay in deep valley of Himalayas, till it was retrieved on July 13, 1999- 56 days later.
Capt. Bharadwaj’s weapon was found in his hand when his body was recovered. He had fought till his last breath.
Never forget, Never forgive
They Died for Us,
RespectJai Hind

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर आपत्तिजनक टिप्पणी
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में किसी भी व्यक्ति को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए. वेबसाइटों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश जारी करने से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकारों को केंद्र के 9 जनवरी के परामर्श का सख्ती से पालन करना चाहिए, जिसमें कहा गया है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए.
न्यायमूर्ति बीएस चौहान और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा, ‘हम राज्य सरकारों को निर्देश देते हैं कि किसी भी गिरफ्तारी से पहले दिशा-निर्देशों (केंद्र द्वारा जारी) का पालन सुनिश्चित करें.’ पीठ ने कहा कि अदालत इस तरह के मामलों में गिरफ्तारियों पर पाबंदी का आदेश जारी नहीं कर सकती क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए (आपत्तिजनक टिप्पणियों से संबंधित) के लागू होने पर शीर्ष अदालत ने रोक नहीं लगाई है जो इसकी संवैधानिक वैधता की पड़ताल कर रही है.
फेसबुक पर टिप्पणियां करने या टिप्पणियों को ‘लाइक’ करने के मामले में लोगों की गिरफ्तारी को लेकर जनता की नाराजगी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 9 जनवरी को सभी राज्यों को परामर्श जारी कर कहा था कि इस तरह के मामलों में बिना किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मंजूरी के किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाए.
न्यायमूर्ति बीएस चौहान और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा, ‘हम राज्य सरकारों को निर्देश देते हैं कि किसी भी गिरफ्तारी से पहले दिशा-निर्देशों (केंद्र द्वारा जारी) का पालन सुनिश्चित करें.’ पीठ ने कहा कि अदालत इस तरह के मामलों में गिरफ्तारियों पर पाबंदी का आदेश जारी नहीं कर सकती क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए (आपत्तिजनक टिप्पणियों से संबंधित) के लागू होने पर शीर्ष अदालत ने रोक नहीं लगाई है जो इसकी संवैधानिक वैधता की पड़ताल कर रही है.
फेसबुक पर टिप्पणियां करने या टिप्पणियों को ‘लाइक’ करने के मामले में लोगों की गिरफ्तारी को लेकर जनता की नाराजगी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 9 जनवरी को सभी राज्यों को परामर्श जारी कर कहा था कि इस तरह के मामलों में बिना किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मंजूरी के किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाए.
फेसबुक पर पढ़े-लिखे पुरुषों की मानसिकता
फेसबुक पर पढ़े-लिखे
पुरुषों की मानसिकता ....... नेहा शर्मा,
स्नेहा राजपूत और अन्य लड़कियों के
नाम से बनाए गए इन फेसबुक पेजों पर
लड़कियों की तस्वीरेंशेयर करके
लोगों से उन्हें लाइक करने के
लिएकहा जाता है, और पूछा जाता है
कैसी लग रही हूं? तो कुछ समझदार लोग
अपनी बुद्दि का पूरा परिचय देते है
लाइक और कमेंट करके ..
ऐसी ही एक फोटो 30 नवंबर को शेयर की गई
थी। यह फोटो एक नाबालिग लड़की की है
जिसे अब तक एक लाख से अधिक लोग लाइक कर
चुके हैं और चार हजार के करीब ने इसे
शेयर भी किया है। इस फोटो पर अब तक 96
हजार से अधिक टिप्पणियां भी आ गई हैं।
यह पेज न सिर्फ फेसबुक के
कम्यूनिटी गाइडलाइंस का खुला उल्लंघन
कर रहा है बल्कि नाबालिग
लड़कियों की तस्वीरें पोस्ट
करकेउन्हें संभावित सेक्स
अपराधों का शिकार बनन के खतरे में
भी डाल रहा है।
इस तरह के पेज का लोकप्रिय होना यह
भी दर्शाता है कि भारत में इंटरनेट
सार्थकता कितनी कम है। लोग
ऐसी तस्वीरें को फेसबुक की गाइडलाइंस
के तहत रिपोर्ट करने के बजाए उन्हें
लाइक करते हैं या उन पर
टिप्पणियां करते हैं। जरा सोचिए एक
नाबालिग बच्ची की तस्वीर डालकर
पूछा गया कि कैसी लग रही हूं
तो उसकी तारीफ करने के लिए
पुरुषों की लाइन ही लग गई। 96 हजार से
अधिक टिप्पणियां आ गईं और युवकों ने
तमाम तरह के खूबसूरत शब्द उसकी तारीफ
में जड़ दिए।
गौर करने वाली बात यह है कि यहां लाइक
और क्लिक करने वाले
लोगों को नहींपता है कि अनजाने में
वो अपराध कर रहे हैं। वो ऐसी पोस्ट
को बढ़ावा दे रहे हैं जिसमें तस्वीर
में दिख रही बच्ची से बिनापूछे
ही उसका फोटो सोशल नेटवर्किंग के जरिए
साझा किया जा रहा है।
यदि भविष्य में आपके सामने इस तरह
की कोई तस्वीर आए तो बेहतर है कि आप उसे
फेसबुक को रिपोर्ट करे न की लाइक
या कमेंट करके अपनी नासमझी का परिचय
दें
Har ek ladki hoti hai maa-baap ki
jaan,
facebook par photo daalkar na
karo badnaam,
kya pta uss din ye dharti hi hil jaye,
jab kisi page par tumhari bahan ki
photo mil jaye,
uss din aankh se bebasi ke aansu
mat rona,
mein sach kahta hu logo ki
apne zameer ko mat khona,
ye poem un facebook pages and
admins ke liye hai,
jo Likes ke liye kisi ladki ki
photo churakar uplod karke ye
puchte hai,
Item kesi hai..?
Aap sab logo se reQuset hai
plz aisi photo ko like na
kare aur ho sake to Report as a
spam kare !!
पुरुषों की मानसिकता ....... नेहा शर्मा,
स्नेहा राजपूत और अन्य लड़कियों के
नाम से बनाए गए इन फेसबुक पेजों पर
लड़कियों की तस्वीरेंशेयर करके
लोगों से उन्हें लाइक करने के
लिएकहा जाता है, और पूछा जाता है
कैसी लग रही हूं? तो कुछ समझदार लोग
अपनी बुद्दि का पूरा परिचय देते है
लाइक और कमेंट करके ..
ऐसी ही एक फोटो 30 नवंबर को शेयर की गई
थी। यह फोटो एक नाबालिग लड़की की है
जिसे अब तक एक लाख से अधिक लोग लाइक कर
चुके हैं और चार हजार के करीब ने इसे
शेयर भी किया है। इस फोटो पर अब तक 96
हजार से अधिक टिप्पणियां भी आ गई हैं।
यह पेज न सिर्फ फेसबुक के
कम्यूनिटी गाइडलाइंस का खुला उल्लंघन
कर रहा है बल्कि नाबालिग
लड़कियों की तस्वीरें पोस्ट
करकेउन्हें संभावित सेक्स
अपराधों का शिकार बनन के खतरे में
भी डाल रहा है।
इस तरह के पेज का लोकप्रिय होना यह
भी दर्शाता है कि भारत में इंटरनेट
सार्थकता कितनी कम है। लोग
ऐसी तस्वीरें को फेसबुक की गाइडलाइंस
के तहत रिपोर्ट करने के बजाए उन्हें
लाइक करते हैं या उन पर
टिप्पणियां करते हैं। जरा सोचिए एक
नाबालिग बच्ची की तस्वीर डालकर
पूछा गया कि कैसी लग रही हूं
तो उसकी तारीफ करने के लिए
पुरुषों की लाइन ही लग गई। 96 हजार से
अधिक टिप्पणियां आ गईं और युवकों ने
तमाम तरह के खूबसूरत शब्द उसकी तारीफ
में जड़ दिए।
गौर करने वाली बात यह है कि यहां लाइक
और क्लिक करने वाले
लोगों को नहींपता है कि अनजाने में
वो अपराध कर रहे हैं। वो ऐसी पोस्ट
को बढ़ावा दे रहे हैं जिसमें तस्वीर
में दिख रही बच्ची से बिनापूछे
ही उसका फोटो सोशल नेटवर्किंग के जरिए
साझा किया जा रहा है।
यदि भविष्य में आपके सामने इस तरह
की कोई तस्वीर आए तो बेहतर है कि आप उसे
फेसबुक को रिपोर्ट करे न की लाइक
या कमेंट करके अपनी नासमझी का परिचय
दें
Har ek ladki hoti hai maa-baap ki
jaan,
facebook par photo daalkar na
karo badnaam,
kya pta uss din ye dharti hi hil jaye,
jab kisi page par tumhari bahan ki
photo mil jaye,
uss din aankh se bebasi ke aansu
mat rona,
mein sach kahta hu logo ki
apne zameer ko mat khona,
ye poem un facebook pages and
admins ke liye hai,
jo Likes ke liye kisi ladki ki
photo churakar uplod karke ye
puchte hai,
Item kesi hai..?
Aap sab logo se reQuset hai
plz aisi photo ko like na
kare aur ho sake to Report as a
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मैंने गाँधी को क्यों मारा " ? नाथूराम गोडसे का अंतिम बयान...
मैंने गाँधी को क्यों मारा " ? नाथूराम गोडसे का अंतिम बयान...
{इसे सुनकर अदालत में उपस्तित सभी लोगो की आँखे गीली हो गई थी
और कई तो रोने लगे थे एक जज महोदय ने अपनी टिपणी में लिखा था की यदि उस समय अदालत में उपस्तित लोगो को जूरी बना जाता और उनसे फेसला देने को कहा जाता तो निसंदेह वे प्रचंड बहुमत सेनाथूराम के निर्दोष होने का निर्देश देते }
नाथूराम जी ने कोर्ट में कहा --सम्मान ,कर्तव्य और अपनेदेश वासियों के प्रति प्यार कभी कभी हमे अहिंसा केसिधांत से हटने के लिए बाध्य कर देता है.में कभी यह नहीं मान सकता की किसी आक्रामक का शसस्त्र प्रतिरोध करना कभी गलत या अन्याय पूर्ण भी हो सकता है .प्रतिरोध करने और यदि संभव हो तो एअसे शत्रु को बलपूर्वक वश में करना , में एक धार्मिक और नेतिक कर्तव्य मानता हु.मुसलमान अपनी मनमानी कर रहे थे.या तो कांग्रेस उनकी इच्छा के सामने आत्मसर्पण कर दे और उनकी सनक,मनमानी और आदिम रवैये के स्वर में स्वर मिलाये अथवा उनकेबिना काम चलाये .वे अकेले ही प्रत्येक वस्तु और व्यक्ति के निर्णायक थे.महात्मा गाँधी अपने लिए
जूरी और जज दोनों थे .गाँधीने मुस्लिमो को खुश करने केलिए हिंदी भाषा के सोंदर्य और सुन्दरता के साथ बलात्कार किया.
गाँधी के सारे प्रयोग केवल और केवल हिन्दुओ की कीमत पर किये जाते थे जो कांग्रेस अपनी देश भक्ति और समाज वाद का दंभ भरा करती थी , उसी ने गुप्त रूप से बन्दुक की नोक पर पकिस्तान को स्वीकार कर लिया और जिन्ना के सामने नीचता से आत्मसमर्पण कर दिया .मुस्लिम तुस्टीकरण की निति के कारन भारत माता के टुकड़े कर दिए गय और 15 अगस्त 1947 के बाद देशका एक तिहाई भाग हमारे लिए ही विदेशी भूमि बन गई.नहरू तथा उनकी भीड़ की स्वीकृति के साथ ही एक धर्म के आधार पर राज्य बना दिया गया .
इसी को वे बलिदानों द्वारा जीती गई सवंत्रता कहते है किसका बलिदान ? जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओ ने गाँधी के सहमती से इस देश को काट डाला,जिसे हम
पूजा की वस्तु मानते है तो मेरा मस्तिष्क भयंकर क्रोध से भर गया .में साहस पूर्वक कहता हु की गाँधी अपने कर्तव्य में असफल हो गय उन्होंने स्वय को पकिस्तानका पिता होना सिद्ध किया .
में कहता हूँ की मेरी गोलिया एक ऐसे व्यक्ति पर चलाई गई थी ,जिसकी नीतियों और कार्यो से करोडो हिन्दुओ को केवल बर्बादी और विनाश ही मिला ऐसे कोई क़ानूनी प्रक्रिया नहीं थी जिसके द्वारा उस अपराधी को सजा दिलाई जा सके इस लियेमेने इस घातक रस्ते का अनुसरण किया..............
मैं अपने लिए माफ़ी की गुजारिश नहीं करूँगा ,जो मेने किया उस पर मुझे गर्व है . मुझे कोई संदेह नहीं है की इतिहास के इमानदार लेखक मेरे कार्य का वजन तोल कर भविष्य में किसी दिन इसका सही मूल्यांकन करेंगे जब तक सिन्धु नदी भारत के ध्वज के नीछे से ना बहे तब तक मेरी अस्थियो का विसर्जन मत करना
{इसे सुनकर अदालत में उपस्तित सभी लोगो की आँखे गीली हो गई थी
और कई तो रोने लगे थे एक जज महोदय ने अपनी टिपणी में लिखा था की यदि उस समय अदालत में उपस्तित लोगो को जूरी बना जाता और उनसे फेसला देने को कहा जाता तो निसंदेह वे प्रचंड बहुमत सेनाथूराम के निर्दोष होने का निर्देश देते }
नाथूराम जी ने कोर्ट में कहा --सम्मान ,कर्तव्य और अपनेदेश वासियों के प्रति प्यार कभी कभी हमे अहिंसा केसिधांत से हटने के लिए बाध्य कर देता है.में कभी यह नहीं मान सकता की किसी आक्रामक का शसस्त्र प्रतिरोध करना कभी गलत या अन्याय पूर्ण भी हो सकता है .प्रतिरोध करने और यदि संभव हो तो एअसे शत्रु को बलपूर्वक वश में करना , में एक धार्मिक और नेतिक कर्तव्य मानता हु.मुसलमान अपनी मनमानी कर रहे थे.या तो कांग्रेस उनकी इच्छा के सामने आत्मसर्पण कर दे और उनकी सनक,मनमानी और आदिम रवैये के स्वर में स्वर मिलाये अथवा उनकेबिना काम चलाये .वे अकेले ही प्रत्येक वस्तु और व्यक्ति के निर्णायक थे.महात्मा गाँधी अपने लिए
जूरी और जज दोनों थे .गाँधीने मुस्लिमो को खुश करने केलिए हिंदी भाषा के सोंदर्य और सुन्दरता के साथ बलात्कार किया.
गाँधी के सारे प्रयोग केवल और केवल हिन्दुओ की कीमत पर किये जाते थे जो कांग्रेस अपनी देश भक्ति और समाज वाद का दंभ भरा करती थी , उसी ने गुप्त रूप से बन्दुक की नोक पर पकिस्तान को स्वीकार कर लिया और जिन्ना के सामने नीचता से आत्मसमर्पण कर दिया .मुस्लिम तुस्टीकरण की निति के कारन भारत माता के टुकड़े कर दिए गय और 15 अगस्त 1947 के बाद देशका एक तिहाई भाग हमारे लिए ही विदेशी भूमि बन गई.नहरू तथा उनकी भीड़ की स्वीकृति के साथ ही एक धर्म के आधार पर राज्य बना दिया गया .
इसी को वे बलिदानों द्वारा जीती गई सवंत्रता कहते है किसका बलिदान ? जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओ ने गाँधी के सहमती से इस देश को काट डाला,जिसे हम
पूजा की वस्तु मानते है तो मेरा मस्तिष्क भयंकर क्रोध से भर गया .में साहस पूर्वक कहता हु की गाँधी अपने कर्तव्य में असफल हो गय उन्होंने स्वय को पकिस्तानका पिता होना सिद्ध किया .
में कहता हूँ की मेरी गोलिया एक ऐसे व्यक्ति पर चलाई गई थी ,जिसकी नीतियों और कार्यो से करोडो हिन्दुओ को केवल बर्बादी और विनाश ही मिला ऐसे कोई क़ानूनी प्रक्रिया नहीं थी जिसके द्वारा उस अपराधी को सजा दिलाई जा सके इस लियेमेने इस घातक रस्ते का अनुसरण किया..............
मैं अपने लिए माफ़ी की गुजारिश नहीं करूँगा ,जो मेने किया उस पर मुझे गर्व है . मुझे कोई संदेह नहीं है की इतिहास के इमानदार लेखक मेरे कार्य का वजन तोल कर भविष्य में किसी दिन इसका सही मूल्यांकन करेंगे जब तक सिन्धु नदी भारत के ध्वज के नीछे से ना बहे तब तक मेरी अस्थियो का विसर्जन मत करना
जलते भी गये, कहते भी गये आज़ादी के परवाने
In memory of the bravest bravehearts India has seen - Shaeed Bhagat Singh, Saheed Shukhdev & Saheed Rajguru!
आज़ादी के परवाने
जीना तो उसी का जीना है
जो मरना वतन पे जाने
ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम
तेरी राहों मैं जां तक लुटा जायेंगे
फूल क्या चीज़ है तेरे कदमों पे हम
भेंट अपने सरों की चढ़ा जायेंगे
कोई पंजाब से, कोई महाराष्ट्र से
कोई यू.पी. से है, कोई बंगाल से
तेरी पूजा की थाली में लाये हैं हम
फूल हर रंग के, आज हर डाल से
नाम कुछ भी सही पर लगन एक है
जोत से जोत दिल की जगा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन...
तेरी जानिब उठी जो कहर की नज़र
उस नज़र को झुका के ही दम लेंगे हम
तेरी धरती पे है जो कदम ग़ैर का
उस कदम का निशाँ तक मिटा देंगे हम
जो भी दीवार आयेगी अब सामने
ठोकरों से उसे हम गिरा जायेंगे
ए वतन ए वतन...
तू ना रोना के तू है भगत सिंह की माँ
मर के भी लाल तेरा मरेगा नहीं
घोड़ी चढ़के तो लाते है दुल्हन सभी
हँसके हर कोई फाँसी चढ़ेगा नहीं
इश्क आज़ादी से आशिकों ने किया
देख लेना उसे हम ब्याह लाएंगे
ऐ वतन ऐ वतन...
जब शहीदों की अर्थी उठे धूम से
देशवालों तुम आँसू बहाना नहीं
पर मनाओ जब आज़ाद भारत का दिन
उस घड़ी तुम हमें भूल जाना नहीं
लौट कर आ सकें ना जहाँ में तो क्या
याद बनके दिलों में तो आ जाएँगे
ऐ वतन ऐ वतन...

Tuesday, 14 May 2013
एक बार जरुर पढ़े..
एक बार जरुर पढ़े..‘‘माँ आपने दो महीने पहले मार्केट में मुझसे दो सौ सत्तर रुपये लिये थे।’’ बड़े बिजनेस मैन बेटे ने अलग रहने वाली निम्न मध्यवर्गीय माँ को याद दिलाया।
हाँ बेटे मुझे याद है।’’ कहते हुए माँ ने उसी समय सौ के तीन नोट बेटे को दे दिये।
मेरे पास टूटे नहीं हैं’’ बेटे के ये कहने पर ‘‘कोई बात नहीं’’ कहकर माँ बेटे की पसंद का हलवा बनाने रसोई में चली गई।’’
उस दिन भी बेटा माँ से मिलने आया था। ठेलेवाले के पास बढ़िया सेब देखकर उसने माँ से रुपये लेकर अपने परिवार के लिए सेब खरीद लिये।
कुछ दिन बाद मिलने पर जब वह माँ को पैसे लौटाने लगा, माँ की आँखों में आँसू आ गये उसके पैसे न लेने पर बेटा बोला, ‘‘ये तो हिसाब की बात है, तीस रुपये इसमें पहले के भी हैं।’’
‘‘बेटे तू मुझसे हिसाब कर रहा है ? फिर ऐसा कभी मत करना। तू किस-किस बात का मुझसे हिसाब करेगा। बोल !
कर सकेगा, सारा हिसाब, चुका सकेगा वो कर्ज जो मेरा तुझ पर है ? तेरे अलग रहने से दिल तो अलग नहीं हुए, मेरा प्यार तो कम नहीं हुआ, तू मेरे लिए अब भी वही है मेरा अपना, सिर्फ मेरा बिट्टू। हमारे रिश्ते में ये हिसाब कहाँ से आ गया ? क्या तू अपने बबलू से हिसाब की बात सोच सकता है ?
दोस्तो माँ का हिसाब कोई कभी पूरा कर ही नही सकता.....॥
माँ तुझे सलाम
माँ तुझे सलाम
किसी बाप का सीना उस वक्त गर्व से चौडा हो जाता है जब उसके बच्चे उसके नक्शे कदम पर चलते हैं ,और वो बच्चा खासकर एक बेटी हो !!!
गर्व है ऐसे फौजी अफसर पर जो खुद देश की सेवा के लिऐ समर्पित है और अब अपनी बेटी को भी देश सेवा के लिऐ समर्पित किया है।जय हिन्द!!जय भारत!!माँ तुझे सलाम
गर्व है ऐसे फौजी अफसर पर जो खुद देश की सेवा के लिऐ समर्पित है और अब अपनी बेटी को भी देश सेवा के लिऐ समर्पित किया है।जय हिन्द!!जय भारत!!माँ तुझे सलाम
श्रीमती विनीता अरोरा!
यह हैं राजस्थान पुलिस की एसपी श्रीमती विनीता अरोरा! जिनसे नाम से बड़े बड़े खूंखार अपराधी डरते हैं....!
इन के हाथ में रिवाल्वर, तोकभी डंड़ा,
जयपुर की सड़कों बराबर इनका दबदबा कायम है.
लेकिन इनका एक दूसरा रूप भी है...!!
जिम्मेदार बेटी, बहू और पत्नी का..
जहां ये अपने फर्ज को ईमानदारी से पूरा करती है,वहीं वे भारतीय परंपराओं
को बखूबी निभा रही हैं...!!!
सामान्यत: ड्यूटी पर महिलापुलिस अधिकारी इस तरह चूडिय़ां पहन कर नहीं आतीं.
अभी उनकी शादी को एक वर्ष भी नहीं हुआ है.वे एक नवेली दुल्हन की तरह हाथों में चूडिय़ां पहन कर ड्यूटी पर आ रही थी..!!
हमारा सलाम देश की इस सच्ची सिपाही विनिता अरोड़ा जी को..!!!!
माँ तुझे सलाम
जयपुर की सड़कों बराबर इनका दबदबा कायम है.
लेकिन इनका एक दूसरा रूप भी है...!!
जिम्मेदार बेटी, बहू और पत्नी का..
जहां ये अपने फर्ज को ईमानदारी से पूरा करती है,वहीं वे भारतीय परंपराओं
को बखूबी निभा रही हैं...!!!
सामान्यत: ड्यूटी पर महिलापुलिस अधिकारी इस तरह चूडिय़ां पहन कर नहीं आतीं.
अभी उनकी शादी को एक वर्ष भी नहीं हुआ है.वे एक नवेली दुल्हन की तरह हाथों में चूडिय़ां पहन कर ड्यूटी पर आ रही थी..!!
हमारा सलाम देश की इस सच्ची सिपाही विनिता अरोड़ा जी को..!!!!
माँ तुझे सलाम
Har waqt meri aankho me dharti ka swpan ho.
Har waqt meri aankho me dharti ka
swpan ho.
Jab kbhi mru to tirnga mera kfan
ho.
Or koi khwahis nhi zindgi me. Jab
kbhi jnmu to BHARAT mera vatan
ho....
swpan ho.
Jab kbhi mru to tirnga mera kfan
ho.
Or koi khwahis nhi zindgi me. Jab
kbhi jnmu to BHARAT mera vatan
ho....
Hindu-Muslim k ahasasat ko mat chhediye
Hindu-Muslim k ahasasat ko mat chhediye,apni kursi k liye jajbato ko mat chhediye,
ham me se koe aarya, koe hud, koe mangol hai,
dafn hai jo bat ab us bat ko mat chhediye,
gar galati Babar ki thi to jumman ka ghar kyu jale,
aaise najuk bakt me halat ko mat chhediye,
chhediye ek jang mil-jul kar apne is mulk k liye,
kisi mazhabi nagmat ko mat chhediye.
देखते है दोस्तों तिरंगे को कितने 'SHARE', LIKE, COMMENT, TAG मिलते है

देखते है दोस्तों तिरंगे को कितने 'SHARE', LIKE, COMMENT, TAG मिलते है
दोस्तो माँ के आग़े कभी खुलकर नही रोना
दोस्तो माँ के आग़े कभी खुलकर नही रोना।
ज़हा बुनियाद हो इतनी नमी अच्चछी नही होती।
लबो पे उसके कभी बद्दुआ नही रहती ।
बस एक माँ ही है ज़ो मुझसे ख़फ़ा नही रहती।
तुझे सब है पता मेरी माँ
आई लव यू माँ
मात दिवस की हार्दिक शुभकामनाये......
ज़हा बुनियाद हो इतनी नमी अच्चछी नही होती।
लबो पे उसके कभी बद्दुआ नही रहती ।
बस एक माँ ही है ज़ो मुझसे ख़फ़ा नही रहती।
तुझे सब है पता मेरी माँ
आई लव यू माँ
मात दिवस की हार्दिक शुभकामनाये......

जब पेट्रोल की जगह हवा से चला बाइक का इंजन
जब पेट्रोल की जगह हवा से चला बाइक का इंजन
नए प्रयोग और खोज सिर्फ़ अमेरिका, ब्रिटेन और आईआईटी के लोगों की बपौती नही है। ये साबित किया है बागपत के एक पॉलिटेक्नीक के छात्र ने, जिसने हवा से चलने वाला इंजन बनाया है। वो भी 18 हज़ार में
चार बार की असफलता के बाद सफल हुए छात्र के प्रयोग से कॉलेज प्रशासन भी खुश है। कॉलेज प्रशासन छात्र की इस नए प्रयोग में सहायता करने के लिए हर तरह से तैयार है।
मूल रुप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का रहने वाला मोहित जिले के कुराली स्थित शांति पॉलीटेक्निक में (मैकेनिक आटोमोबाइल ट्रेड) अंतिम वर्ष का छात्र है।
मोहित ने यामहा बाइक के स्ट्रोक इंजन को हवा से चलाकर लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। मोहित के अनुसार दो वर्ष पूर्व कॉलेज जाते समय उसने एक ट्रक के प्रेशर ब्रेक से ओवर होने पर हवा निकलने की आवाज सुनीं थी।
इसके बाद उसने प्रेशर ब्रेक के सिद्धांत पर हवा से चलने वाले इंजन की कल्पना की। अपनी कल्पना को अंजाम देने के लिए उसने कबाड़ी से चार हजार रुपये एक यामाहा बाइक का टू-स्ट्रोक इंजन खरीदा।
इसके बाद वह हवा से चलने वाले इंजन को बनाने में जुट गया। इसमें उसने कॉलेज अध्यापकों से भी सलाह ली। वह चार बार अपनी खोज में असफल रहा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
एक माह पूर्व वह पांचवीं बार अपनी सोच को हकीकत में बदलने में कामयाब हो गया। मोहित के अनुसार उसने बाइक के इंजन में कुछ बदलाव कर प्लग के स्थान पर वाल्व लगाए।
हवा को कंप्रेशर के जरिए एक सिंलडर में हाइ प्रेशर पर जमा किया। हाइ प्रेशर हवा को पाइप के माध्यम से इंजन में पहुंचाया। इससे इंजन चल पड़ा।
मोहित ने बताया कि इंजन की क्षमता पेट्रोल से चलने वाले इंजन के बराबर है और आरपीएम (राउंड पर मिनट) भी पूरे हैं। नई खोज को देखने वाले लोग दंग रह गए।
छात्र ने बताया कि प्रयोग में 18 हजार रुपये का खर्चा आया है। इसे उसने अपनी पॉकेट मनी से जमा किया था।
from
भारत एक हिंदू राष्ट्र है
नए प्रयोग और खोज सिर्फ़ अमेरिका, ब्रिटेन और आईआईटी के लोगों की बपौती नही है। ये साबित किया है बागपत के एक पॉलिटेक्नीक के छात्र ने, जिसने हवा से चलने वाला इंजन बनाया है। वो भी 18 हज़ार में
चार बार की असफलता के बाद सफल हुए छात्र के प्रयोग से कॉलेज प्रशासन भी खुश है। कॉलेज प्रशासन छात्र की इस नए प्रयोग में सहायता करने के लिए हर तरह से तैयार है।
मूल रुप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का रहने वाला मोहित जिले के कुराली स्थित शांति पॉलीटेक्निक में (मैकेनिक आटोमोबाइल ट्रेड) अंतिम वर्ष का छात्र है।
मोहित ने यामहा बाइक के स्ट्रोक इंजन को हवा से चलाकर लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। मोहित के अनुसार दो वर्ष पूर्व कॉलेज जाते समय उसने एक ट्रक के प्रेशर ब्रेक से ओवर होने पर हवा निकलने की आवाज सुनीं थी।
इसके बाद उसने प्रेशर ब्रेक के सिद्धांत पर हवा से चलने वाले इंजन की कल्पना की। अपनी कल्पना को अंजाम देने के लिए उसने कबाड़ी से चार हजार रुपये एक यामाहा बाइक का टू-स्ट्रोक इंजन खरीदा।
इसके बाद वह हवा से चलने वाले इंजन को बनाने में जुट गया। इसमें उसने कॉलेज अध्यापकों से भी सलाह ली। वह चार बार अपनी खोज में असफल रहा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
एक माह पूर्व वह पांचवीं बार अपनी सोच को हकीकत में बदलने में कामयाब हो गया। मोहित के अनुसार उसने बाइक के इंजन में कुछ बदलाव कर प्लग के स्थान पर वाल्व लगाए।
हवा को कंप्रेशर के जरिए एक सिंलडर में हाइ प्रेशर पर जमा किया। हाइ प्रेशर हवा को पाइप के माध्यम से इंजन में पहुंचाया। इससे इंजन चल पड़ा।
मोहित ने बताया कि इंजन की क्षमता पेट्रोल से चलने वाले इंजन के बराबर है और आरपीएम (राउंड पर मिनट) भी पूरे हैं। नई खोज को देखने वाले लोग दंग रह गए।
छात्र ने बताया कि प्रयोग में 18 हजार रुपये का खर्चा आया है। इसे उसने अपनी पॉकेट मनी से जमा किया था।
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भारत एक हिंदू राष्ट्र है
आज मंगलवार है सभी हनुमंत भक्त एक बार हनुमान चालीसा का जाप करे..
आज मंगलवार है सभी हनुमंत भक्त एक बार हनुमान चालीसा का जाप करे..
दोहा
श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि
बरनउ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥
विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मनबसिया॥८॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥
लाय सजीवन लखन जियाए
श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही
जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥
राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥
भूत पिशाच निकट नहि आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥
और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥
संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥
जै जै जै हनुमान गुसाईँ
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा
होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥
दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
दोहा
श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि
बरनउ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥
विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मनबसिया॥८॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥
लाय सजीवन लखन जियाए
श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही
जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥
राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥
भूत पिशाच निकट नहि आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥
और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥
संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥
जै जै जै हनुमान गुसाईँ
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा
होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥
दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
JUST CHILL MUMMA I HAVE GOVERMNET JOB SO WHY I CARE OF INDIA
ये
कूल डूड वही है जिनके पूर्वज अंग्रेजो की आर्मी और पुलिस में थे और इन्ही
के कारण देश गुलाम था क्युकी अंग्रेज तो बहुत कम थे और जब इनकी माँ इनसे
कहती थी बेटा भारत को अंग्रेज लूट के ले जा रहे है तो ये जबाब देते थे
-JUST CHILL MUMMA I HAVE GOVERMNET JOB SO WHY I CARE OF INDIA .
आज के जमाने में ये अच्छी जॉब पर लग गये और जब इनकी माँ पूछती है की बेटा कांग्रेस देश को लूट रही है तो ये जबाब देते है। THIS IS NOT MY WORK MOM. I HAVE A GUD JOB भाड़ में जाये कांग्रेस आओ खाना खाते है
आज के जमाने में ये अच्छी जॉब पर लग गये और जब इनकी माँ पूछती है की बेटा कांग्रेस देश को लूट रही है तो ये जबाब देते है। THIS IS NOT MY WORK MOM. I HAVE A GUD JOB भाड़ में जाये कांग्रेस आओ खाना खाते है
डेंगू बुखार का इलाज !
कमड़ तोड़ती मंहगाई के समय मे आम आदमी का कुछ तो पैसा बचाये ! जरूर शेयर करे !
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डेंगू बुखार का इलाज !
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गिलोय बेल की डंडी ले ! डंडी के छोटे टुकड़े करे !
2 गिलास पानी मे उबाले ! जब पानी आधा रह जाये !
ठंडा होने पर रोगी को पिलाये !
मात्र 45 मिनट बाद cell बढ़ने शुरू हो जाएँगे !!
इससे अच्छा और सस्ता कोई इलाज नहीं डेंगू बुखार का !
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http://www.youtube.com/watch?v=dbtuhIvQ6E4
वन्देमातरम !
from
भारत एक हिंदू राष्ट्र है

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